Kash Koi !

 

शायरी शायर के मन और दिल के उड़ान का शब्द रूप होता है

    शायरी, शेर-ओ-शायरी या सुख़न भारतीय उपमहाद्वीप में प्रचलित एक कविता का रूप है जिसमे उर्दू-हिंदी भाषाओं में कविताएँ लिखी जाती है। शायरी में संस्कृत, फारसी, अरबी और तुर्की भाषाओं के मूल शब्दों का मिश्रित प्रयोग किया जाता है। शायरी लिखने वाले को शायर या सुख़नवर कहा जाता है। 

काश कोई 

आज मैं हूँ
और शायद कल भी मैं रहूँ,
पर क्या कल परिस्थितियाँ वैसे ही रहेंगीं जैसे आज है?
आज तो हर कोई मेरे साथ है।
पर क्या कल जब सब कुछ टूट छूट जाए तो क्या कोई साथ देगा?
काश! कोई साहिल मेरे लिए होता,जिसमें जिन्दगी के उलझे पन्नों को सुलझाता।
लगता नहीं की ऐसा होगा,
क्योंकि यंहा कोई किसी का नहीं अपने सारे बेगाने से हो जायेंगे।
और शायद नदी की तेज बहाव में, ऐसा बहता चला जाऊंगा,
जिसका साहिल कभी मुझे मिल न पायेगा।
आज जिस साहिल के पाने का एहसास है,
शायद कल वह होगा ही नहीं।